"OTP से राशन, अंगूठा हुआ बेकार – क्या अब तकनीक ही तय करेगी गरीब की भूख?"

"OTP  से राशन, अंगूठा हुआ बेकार – क्या अब तकनीक ही तय करेगी गरीब की भूख?"


 "OTP  से राशन, अंगूठा हुआ बेकार – क्या अब तकनीक ही तय करेगी गरीब की भूख?"


Himachaltoday.in

मंडी, हिमाचल प्रदेश | 12 जून | विशेष रिपोर्ट

प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब OTP आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने यह व्यवस्था अस्थायी समाधान के रूप में लागू की है, क्योंकि फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक प्रणाली फिलहाल ठप पड़ी है।

अंगूठा फेल, भूख पास?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के दिशा-निर्देशों के तहत मंडी ज़िले में PDS प्रणाली में अंगूठे (फिंगरप्रिंट) से राशन देने की व्यवस्था की गई थी। परंतु तकनीकी कारणों और सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन ठेके की निविदा के चलते यह प्रणाली फिलहाल अटक गई है।

OTP से होगा प्रमाणीकरण

अब तक जिन लाभार्थियों की उंगलियों के निशान काम नहीं करते थे – वृद्ध, मजदूर, विकलांग या त्वचा से संबंधित समस्याओं वाले – वे बार-बार अपमान और परेशानी का सामना कर रहे थे। अब प्रशासन ने कहा है कि वे अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से राशन प्राप्त कर सकते हैं। 

कुल कितने उपभोक्ता हैं एपीएल परिवार

प्रदेश में एपीएल कार्डधारकों की संख्या 12 लाख 24 हजार 448 है. विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इसमें एपीएल टैक्स पेयर कार्डधारकों की कुल संख्या 72 हजार 445 है. वहीं, 11 लाख 52 हजार 03 नॉन टैक्स पेयर एपीएल कार्ड धारकों की संख्या है. इस तरह से एपीएल कार्ड धारकों की कुल आबादी 44 लाख 19 हजार 312 बनती है, जिसमें नॉन टैक्स पेयर एपीएल परिवारों की आबादी 41 लाख 26 हजार 583 है. वहीं, टैक्स पेयर की आबादी 2 लाख 92 हजार 729 है, 

राशन वितरण में फर्जीवाड़ा रोकने को जरूरी हैं ये मशीनें

गौरतलब है कि आधार प्रमाणीकरण डिवाइस का उपयोग लाभार्थियों की डिजिटल पहचान सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, जिससे यह तय हो सके कि राशन सही व्यक्ति को मिल रहा है। अंगूठे की बायोमेट्रिक पहचान से फर्जीवाड़ा रुकता है और वितरण प्रणाली पारदर्शी रहती है।

विभाग के पास इस समय जो मशीनें हैं, वह 2017 में खरीदी गई थीं और उनकी तकनीकी वैधता भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अधीन आती है। अब इन मशीनों की वैलिडिटी पूरी हो चुकी है. 

फेस रेकग्निशन भी आ रहा है

अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में आधार आधारित फेस रेकग्निशन प्रमाणीकरण को भी सिस्टम में शामिल किया जाएगा, लेकिन उसकी प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। 

प्रशासन की अपील: मोबाइल नंबर करें अपडेट

जिला नियंत्रक खाद्य नागरिक आपूर्ति ब्रिजेन्द्र सिंह पठानिया ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के राशन कार्ड में मोबाइल नंबर दर्ज नहीं हैं, वे पहले आधार में मोबाइल अपडेट करवाएं, फिर उसे राशन कार्ड में दर्ज करवाएं। इससे राशन वितरण में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। 

विवाद और जनता की आशंका

सरकार की इस व्यवस्था को लेकर ज़मीन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या?

  • जिनके पास फोन नहीं है, क्या वे राशन से वंचित होंगे?

  • तकनीक के भरोसे गरीब की भूख तय होगी?

स्थानीय निवासियों का तर्क:

"अब राशन भी पासवर्ड से मिलेगा? तो अनपढ़, वृद्ध और गरीब क्या करें?"

क्या करें अगर परेशानी हो?

प्रशासन ने कहा है कि यदि किसी को राशन लेने में समस्या हो रही है तो वह अपने क्षेत्र के खाद्य निरीक्षक या जिला खाद्य कार्यालय मंडी से संपर्क कर सकता है।

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