Viral News: वन्यजीव संरक्षण जैसे गंभीर विषय को बंद कमरे तक सीमित
पर्यावरण संरक्षण पर भाषण
जमीनी हकीकत पर सवाल
हिमाचल टुडे टीवी - सुंदरनगर | 3 मार्च 2026|
विश्व वन्यजीव दिवस और राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के नाम पर सुंदरनगर में आयोजित कार्यक्रम अब सवालों के घेरे में है। Himachal Pradesh State Pollution Control Board की क्षेत्रीय प्रयोगशाला, सुंदरनगर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वन्यजीव संरक्षण जैसे गंभीर विषय को बंद कमरे तक सीमित कर दिया गया।
जारी बयान के अनुसार, कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वैज्ञानिक जागरूकता पर जानकारी दी गई। कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी रेनू बाला ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सुंदरनगर में व्याख्यान देते हुए वन्यजीव संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं प्रभारी वैज्ञानिक अधिकारी चमन लाल ठाकुर ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर लगभग 40 विद्यार्थियों को प्रयोगशाला का शैक्षणिक भ्रमण करवाते हुए प्रदूषकों की सैंपलिंग, विश्लेषण और पर्यावरण निगरानी में उपयोग होने वाले उपकरणों की जानकारी दी।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि वन्यजीव दिवस जैसे अवसर पर कार्यक्रम को केवल औपचारिक भाषणों और प्रयोगशाला भ्रमण तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उनका सवाल है कि जब क्षेत्र में अवैध खनन, प्लास्टिक कचरा और जल स्रोतों के प्रदूषण जैसी समस्याएं मौजूद हैं, तो क्या केवल सेमिनार और प्रस्तुतियां ही पर्यावरण संरक्षण का प्रमाण हैं?
स्थानीय लोगों का तर्क है कि यदि बोर्ड वास्तव में वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर है, तो स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता रैलियां, वृक्षारोपण अभियान या फील्ड विजिट जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने चाहिए थे।
फिलहाल बोर्ड की ओर से जारी बयान में कार्यक्रम को सफल बताया गया है और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया गया है। लेकिन सवाल यही है—क्या पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों तक सीमित रह जाएगा, या जमीनी स्तर पर भी ठोस कदम उठाए जाएंगे?
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