नेरचौक से सरकाघाट शिफ्ट होगा अटल आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय-, स्वतंत्रता
दिवस पर CM सुक्खू की बड़ी घोषणा
HimachalTodayTv
मंडी (हिमाचल प्रदेश), 16 अगस्त (ब्यूरो)।
हिमाचल प्रदेश के 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक ऐतिहासिक और विवादित घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि अटल आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय, जो वर्तमान में नेरचौक (मंडी) में संचालित है, उसे सरकाघाट स्थानांतरित किया जाएगा। इस ऐलान ने पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
जहाँ सरकाघाट के लोग इसे क्षेत्र के विकास के लिए बड़ा तोहफा मान रहे हैं, वहीं नेरचौक और मंडी क्षेत्र के लोगों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक दबाव और वोट बैंक को साधने के लिए लिया गया है।
स्वतंत्रता
दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बड़ी घोषणाएँ
सरकाघाट में आयोजित राज्य
स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी
ली। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं जिनमें प्रमुख हैं –
आपदा
प्रभावितों के लिए 100 करोड़ रुपये का राहत पैकेज।
+आपदा
न्यूनीकरण एवं आजीविका सुरक्षा परियोजना के लिए 3,000
करोड़ रुपये।
+ 9,500
से अधिक शिक्षकों की भर्ती और 200 नए CBSE स्कूल।
+ शिक्षकों
की सत्र के मध्य सेवानिवृत्ति पर रोक।
+ नशा
मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन।
+ युवाओं
के लिए 2,000
ई-तिपहिया वाहनों के परमिट और 61 करोड़ रुपये की सोलर पैनल सब्सिडी।
लेकिन इनमें से सबसे अधिक
सुर्खियां बटोरने वाला निर्णय विश्वविद्यालय स्थानांतरण का रहा।
नेरचौक
क्यों नाराज़?
नेरचौक में पहले से
मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और शोध संस्थान स्थापित हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय यहाँ रहने से पूरे मंडी
जिला को एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने का सपना साकार हो रहा था। लेकिन अब
इसे सरकाघाट ले जाने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है बल्कि राजनीतिक सौदेबाज़ी भी
प्रतीत होता है।
सरकाघाट
में खुशी की लहर
दूसरी ओर सरकाघाट के लोग
और स्थानीय कांग्रेस नेता पवन ठाकुर इस घोषणा से गदगद हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की
वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। विश्वविद्यालय आने से रोजगार, स्वास्थ्य
सुविधाएँ और शिक्षा के नए अवसर पैदा होंगे।
आपदा
और राहत की घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने इस अवसर
पर आपदा पीड़ितों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने बताया
कि वर्ष 2023
की आपदाओं से प्रदेश को 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन
केंद्र सरकार से केवल 1,500 करोड़ रुपये की मदद मिली। राज्य सरकार अब
तक अपने संसाधनों से 360.42 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और अब
अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, क्षतिग्रस्त
मकानों का मुआवज़ा 1.3 लाख रुपये से बढ़ाकर 7
लाख रुपये करने और आंशिक क्षति पर एक लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।
नशा
मुक्ति पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि
सरकार ने ड्रग माफिया की 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की
है। पीआईटी एनडीपीएस एक्ट लागू किया गया है और अब नशा मुक्ति रोकथाम व पुनर्वास
बोर्ड गठित किया जाएगा। पंचायत स्तर तक एंटी ड्रग समितियाँ बनाने के भी आदेश दिए
गए हैं।
शिक्षा
और रोजगार क्षेत्र में सुधार
सरकार ने ऐलान किया कि 9,535
नए शिक्षकों के पद भरे जाएंगे। राज्य में 200
नए CBSE
स्कूल
खोले जाएंगे। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु पुलिस, पटवारी, JBT, डॉक्टर
और पंचायत सचिव के हजारों पद भरे जाएंगे।
विपक्ष
का हमला –
"राजनीतिक स्थानांतरण"
बीजेपी नेताओं ने इस
फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय
का नेरचौक से सरकाघाट स्थानांतरण प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से गलत है। इससे
प्रदेश के संसाधनों का दुरुपयोग होगा और पहले से बने बुनियादी ढांचे का नुकसान
होगा।
विधायक चंद्रशेखर, सुरेश कुमार, रंजीत राणा, दलीप ठाकुर, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयोजक अतुल क्राहटा, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, जीवन ठाकुर और चंपा ठाकुर, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कांग्रेस पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
Read More:
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बड़ी घोषणाएँ
सरकाघाट में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं जिनमें प्रमुख हैं –
आपदा
प्रभावितों के लिए 100 करोड़ रुपये का राहत पैकेज।
+आपदा
न्यूनीकरण एवं आजीविका सुरक्षा परियोजना के लिए 3,000
करोड़ रुपये।
+ 9,500
से अधिक शिक्षकों की भर्ती और 200 नए CBSE स्कूल।
+ शिक्षकों
की सत्र के मध्य सेवानिवृत्ति पर रोक।
+ नशा
मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन।
+ युवाओं के लिए 2,000 ई-तिपहिया वाहनों के परमिट और 61 करोड़ रुपये की सोलर पैनल सब्सिडी।
लेकिन इनमें से सबसे अधिक सुर्खियां बटोरने वाला निर्णय विश्वविद्यालय स्थानांतरण का रहा।
नेरचौक क्यों नाराज़?
नेरचौक में पहले से मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और शोध संस्थान स्थापित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय यहाँ रहने से पूरे मंडी जिला को एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने का सपना साकार हो रहा था। लेकिन अब इसे सरकाघाट ले जाने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है बल्कि राजनीतिक सौदेबाज़ी भी प्रतीत होता है।
दूसरी ओर सरकाघाट के लोग और स्थानीय कांग्रेस नेता पवन ठाकुर इस घोषणा से गदगद हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। विश्वविद्यालय आने से रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा के नए अवसर पैदा होंगे।
आपदा और राहत की घोषणाएँ
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आपदा पीड़ितों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 की आपदाओं से प्रदेश को 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार से केवल 1,500 करोड़ रुपये की मदद मिली। राज्य सरकार अब तक अपने संसाधनों से 360.42 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और अब अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, क्षतिग्रस्त
मकानों का मुआवज़ा 1.3 लाख रुपये से बढ़ाकर 7
लाख रुपये करने और आंशिक क्षति पर एक लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।
नशा मुक्ति पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ड्रग माफिया की 42 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। पीआईटी एनडीपीएस एक्ट लागू किया गया है और अब नशा मुक्ति रोकथाम व पुनर्वास बोर्ड गठित किया जाएगा। पंचायत स्तर तक एंटी ड्रग समितियाँ बनाने के भी आदेश दिए गए हैं।
शिक्षा और रोजगार क्षेत्र में सुधार
सरकार ने ऐलान किया कि 9,535 नए शिक्षकों के पद भरे जाएंगे। राज्य में 200 नए CBSE स्कूल खोले जाएंगे। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु पुलिस, पटवारी, JBT, डॉक्टर और पंचायत सचिव के हजारों पद भरे जाएंगे।
विपक्ष का हमला – "राजनीतिक स्थानांतरण"
बीजेपी नेताओं ने इस फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय का नेरचौक से सरकाघाट स्थानांतरण प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से गलत है। इससे प्रदेश के संसाधनों का दुरुपयोग होगा और पहले से बने बुनियादी ढांचे का नुकसान होगा।
विधायक चंद्रशेखर, सुरेश कुमार, रंजीत राणा, दलीप ठाकुर, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के संयोजक अतुल क्राहटा, हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के सदस्य विजय पाल सिंह, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, नरेश चौहान, जीवन ठाकुर और चंपा ठाकुर, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कांग्रेस पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
Read More:
यह भी पढें :- Old age Penson: मंडी जिले में 10 हजार बुजुर्गों की पेंशन लटकी, सरकार के वादे हवा हवाई
यह भी पढें :- मंडी न्यूज़ अपडेट: बस रूट आवेदन की तारीख बढ़ी, आंगनबाड़ी साक्षात्कार में बदलाव, बारिश को लेकर अलर्ट
यह भी पढें :- सेवानिवृत्ति से पूर्व मंडी पहुंचे निदेशक अभियोजन महेंद्र सिंह चौहान, किया अधिकारियों से संवाद
यह भी पढें :- सुंदरनगर की नर्वदा शर्मा बनीं मिसेज़ फैशनेबल – नौकरी और मॉडलिंग में रचा नया इतिहास
यह भी पढें :- I.T.I. पास युवा 400 रु. दिहाडी पर मजबूर! मंडी में रोजगार की हकीकत से उठा परदा
यह भी पढें :- नशे में डूबता हिमाचल: अब महिलाएं और किशोर भी बने निशाना, कब्रिस्तान-श्मशान तक बना अड्डा!
यह भी पढें :- 2023 की आपदा रिलीफ के 10 हजार करोड के बदले केंद्र ने दिए 1500 करोड : नरेंद्र मोदी आपदा पर भी मौन
0 Comments