बंजार वैली में NH-305 की खस्ता हालत पर भड़के हेम राज शर्मा, कहा – ‘पर्यटन और जनजीवन खतरे में’
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बंजार (कुल्लू) – हिमाचल प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखने वाली गुशैनी वैली (रोहला भंडार) इन दिनों सड़क की बदहाल स्थिति के कारण सुर्खियों में है। बंजार विधानसभा क्षेत्र के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता 'हेम राज शर्मा' ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 'राष्ट्रीय राजमार्ग 305 (NH-305)' की दयनीय हालत पर तीखा प्रहार किया है।
‘तथाकथित राष्ट्रीय राजमार्ग, लेकिन हालत गांव की पगडंडी जैसी’
हेम राज शर्मा ने कहा कि कुछ वर्षों पहले औट से बंजार सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग 305 घोषित किया गया था। लेकिन हकीकत में इस तथाकथित राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति ऐसी है कि इसे देखकर किसी भी चालक की रूह कांप सकती है।
उन्होंने कहा – “NH-305 पर गाड़ी चलाना हर सेकंड अपनी जान जोखिम में डालने जैसा है। संकीर्ण सड़क, जगह-जगह गहरे गड्ढे और टूटे किनारे वाहनों के ट्रैक से बाहर निकलने को मजबूर कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की पूरी संभावना बनी रहती है।”
पर्यटन उद्योग पर मंडरा रहा खतरा
गुशैनी वैली और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान रखते हैं। हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। लेकिन NH-305 की खस्ता हालत ने पर्यटन कारोबार को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
हेम राज शर्मा का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में यहां का पर्यटन उद्योग बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा।
जनजीवन हो रहा बेहाल
यह सड़क न केवल पर्यटकों के लिए, बल्कि **आंतरिक सराज, बाहरी सराज और मंडी सराज** के हजारों लोगों के लिए भी जीवन रेखा है। लोग रोजाना इस मार्ग से अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालयों तक जाते हैं।
उन्होंने कहा – “बंजार मुख्यालय तक पहुंचना भारी मुश्किल हो गया है। बीमार बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना किसी पहाड़ी जंग पार करने जैसा है।”
फेसबुक और व्हाट्सऐप तक सीमित विरोध’
हेम राज शर्मा ने सत्ताधारी और विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि NH-305 की बदहाली पर नेता सिर्फ फेसबुक और व्हाट्सऐप पर गुस्सा जताकर चुप हो जाते हैं, जबकि असल में जनता की पीड़ा सुनने और समाधान निकालने कोई आगे नहीं आता।
उनका कहना है कि अब वक्त आ गया है कि 'सभी जागरूक लोग एकजुट होकर राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यालय का घेराव करें' और सड़क उन्नयन के लिए दबाव बनाएं।
सेब सीजन में बढ़ी मुसीबतें
इन दिनों क्षेत्र में 'सेब का सीजन' अपने चरम पर है। खराब सड़कों के कारण बागवानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है। जगह-जगह जाम लगने से समय और पैसों का नुकसान हो रहा है। ट्रक और जीप चालक खतरनाक हालात में माल ढोने को मजबूर हैं।
अस्पताल तक पहुंचना चुनौती से कम नहीं
हेम राज शर्मा ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब किसी मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ता है। सड़क के गड्ढों और टूटे किनारों से गुजरते समय न केवल समय बर्बाद होता है बल्कि मरीज की हालत भी बिगड़ने का खतरा रहता है।
बंजार अस्पताल तक पहुंचने के लिए गर्भवती महिलाओं को जितनी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है, उसकी कल्पना करना भी कठिन है।
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर NH-305 की हालत को प्राथमिकता के आधार पर नहीं सुधारा गया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। इसमें स्थानीय लोग, पर्यटक संघ, व्यापारी और बागवान शामिल होंगे।
सरकार और एनएचएआई को समझना होगा कि यह सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी और रोजी-रोटी का सवाल है।”
बैठक में शामिल रहे गणमान्य
इस प्रेस वार्ता में जीभी वैली पर्यटक संघ के अध्यक्ष 'पूर्व कैप्टन किशन सिंह', 'डॉ. जोगिंदर ठाकुर', 'अधिवक्ता विजय पटियाल', 'अधिवक्ता तेजा ठाकुर', 'SDO नरेंद्र ठाकुर' समेत कई स्थानीय गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने एकमत होकर सड़क सुधार को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की।
स्थानीयों की मांगें
1. NH-305 के पूरे ट्रैक की तुरंत मरम्मत और चौड़ीकरण।
2. गहरे गड्ढों को भरना और किनारों को मजबूत करना।
3. पर्यटन सीजन और सेब सीजन में अतिरिक्त यातायात प्रबंधन।
4. एंबुलेंस और जरूरी सेवाओं के लिए प्राथमिकता लेन।
5. सड़क निर्माण और मरम्मत में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
बंजार वैली की खूबसूरती और पर्यटन क्षमता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन NH-305 की खस्ता हालत इस क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो न केवल पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान होगा, बल्कि स्थानीय लोगों का रोजमर्रा का जीवन भी असंभव हो जाएगा।
हेम राज शर्मा और स्थानीय जागरूक नागरिकों की यह आवाज़ अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सड़कों तक पहुंचने वाली है — और संभव है कि आने वाले दिनों में बंजार एक बड़े जन आंदोलन का गवाह बने। ...डोला सिंह महंत की रिपोर्ट।
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