BBMB कर्मचारियों का आक्रोश: 2023 से बकाया उत्पादन भत्ता नहीं मिला, पंजाब सरकार और प्रबंधन पर वादाखिलाफी के आरोप

BBMB कर्मचारियों का आक्रोश: 2023 से बकाया उत्पादन भत्ता नहीं मिला, पंजाब सरकार और प्रबंधन पर वादाखिलाफी के आरोप
BBMB कर्मचारियों का आक्रोश: 2023 से बकाया उत्पादन भत्ता नहीं मिला, पंजाब सरकार और प्रबंधन पर वादाखिलाफी के आरोप

2023 से बकाया उत्पादन भत्ता नहीं मिला, बीबीएमबी कर्मचारियों का सब्र टूटा
पंजाब सरकार और बीबीएमबी प्रबंधन पर वादाखिलाफी के आरोप
भाखड़ा-ब्यास इंप्लाईज यूनियन एटक ने खोला मोर्चा

Himachal Today Tv.

सुंदरनगर/मंडी।
देश की ऊर्जा सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में कार्यरत कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। वर्ष 2023 से अब तक बकाया उत्पादन भत्ता (Production Allowance) और अन्य लंबित मांगों को लेकर भाखड़ा-ब्यास इंप्लाईज यूनियन एटक ने बीबीएमबी प्रबंधन और पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सुंदरनगर के सलापड़ में यूनियन प्रधान इंद्रराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कर्मचारियों से किए गए वादे जल्द पूरे नहीं किए गए, तो आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।

लोहड़ी पर वादा, लेकिन जेब रही खाली

यूनियन प्रधान इंद्रराज ने पंजाब की मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोहड़ी पर्व पर राज्य कर्मचारियों को 16 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) देने की घोषणा की गई थी, लेकिन बीबीएमबी कर्मचारियों को आज तक इसका लाभ नहीं मिला। यह न केवल कर्मचारियों के साथ भेदभाव है, बल्कि सरकारी वादों की सच्चाई पर भी सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब पंजाब सरकार खुद को कर्मचारी हितैषी बताती है, तो फिर बीबीएमबी कर्मचारियों को उनका हक क्यों नहीं दिया जा रहा?

2023 से बकाया उत्पादन भत्ता बना बड़ा मुद्दा

यूनियन का कहना है कि वर्ष 2023 से अब तक कर्मचारियों को उत्पादन भत्ता नहीं दिया गया है, जबकि भाखड़ा परियोजना लगातार रिकॉर्ड विद्युत उत्पादन कर रही है। करोड़ों लोगों को बिजली और सिंचाई सुविधा देने वाले कर्मचारी खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इंद्रराज ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो कर्मचारी दिन-रात राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं, उन्हें उनका वैधानिक हक देने में प्रबंधन टालमटोल कर रहा है।

खंडहर बन चुकी हैं बीबीएमबी की कॉलोनियां

यूनियन नेताओं ने बीबीएमबी की रिहायशी कॉलोनियों की बदहाल स्थिति को भी उजागर किया। नंगल टाउनशिप, तलवाड़ा, कोटला, गंगूवाल, सलापड़, सुंदरनगर, पंडोह सहित जालंधर, पानीपत, कुरुक्षेत्र, दिल्ली और बल्लभगढ़ की अधिकांश कॉलोनियां खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। यूनियन का आरोप है कि बोर्ड के पास पर्याप्त भूमि और इमारतें होते हुए भी उनका कोई सुनियोजित उपयोग नहीं किया जा रहा।

खाली मकानों को लीज पर देने की मांग

यूनियन ने बीबीएमबी प्रबंधन से मांग की है कि एक विशेष नीति बनाकर खाली पड़े मकानों को अधिकारियों और कर्मचारियों को लीज पर दिया जाए, ताकि एक ओर कर्मचारियों को आवास सुविधा मिले और दूसरी ओर बोर्ड को राजस्व भी प्राप्त हो। इसके साथ ही खाली जमीनों का आधुनिक तकनीक से पुनर्निर्माण कर उन्हें उपयोगी बनाए जाने की भी मांग उठाई गई।

डेली वेज और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के साथ अन्याय

यूनियन नेताओं ने कहा कि बीबीएमबी में वर्षों से सेवा दे रहे डेली वेज कर्मचारियों को आज तक नियमित नहीं किया गया। वहीं अनुबंध कर्मचारियों को ओवरटाइम और शिफ्ट अलाउंस जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। पेस्को कर्मचारियों को बीबीएमबी के अपने पे-रोल पर लाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

पदोन्नतियों में खामियां, एरियर भी लंबित

यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों की पदोन्नतियों में वर्षों से खामियां बनी हुई हैं। संशोधित वेतनमानों का एरियर भी अब तक एकमुश्त नहीं दिया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।

यूनियन नेताओं की एकजुट चेतावनी

बैठक में यूनियन महासचिव मनोज कुमार देसवाल, नंगल प्रधान नंद किशोर शर्मा, वरिष्ठ उप प्रधान चरणजीत सिंह, उप महासचिव रमेश कुमार, संयुक्त सचिव सोहन लाल, किशोरी लाल, दिनेश कुमार सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।नेताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि बीबीएमबी प्रबंधन और पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज किया, तो यूनियन बड़े स्तर पर संघर्ष के लिए मजबूर होगी।

राष्ट्र धरोहर, लेकिन कर्मचारियों की अनदेखी

यूनियन का कहना है कि भाखड़ा परियोजना को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहां कार्यरत कर्मचारी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। करोड़ों की आय देने वाला बोर्ड अपने ही कर्मचारियों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहा, जो गंभीर चिंता का विषय है। 

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