MSME फेस्ट 2026: 37 एमओयू से हिमाचल में 10,000 करोड़ निवेश, औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति
एमएसएमई फेस्ट-निवेश का नया अध्याय, 37 एमओयू से निवेश होंगे 10,000 करोड़-एमएसएमई से हिमाचल की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
उद्योगों को बिजली सस्ती देंगे
हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 के दूसरा दिन एक आर्थिक मील का पत्थर बनकर सामने आया। एमएसएमई से हिमाचल की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। एमएसएमई फेस्ट-निवेश का नया अध्याय जुड रहा है। 37 एमओयू से 10,000 करोड़ निवेश होंगे।
शिमला के ऐतिहासिक पीटरहॉफ परिसर में आयोजित इन्वेस्टर मीट ने राज्य की निवेश क्षमता, नीति स्थिरता और भविष्य उन्मुख औद्योगिक दृष्टि को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित किया।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने राज्य में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने हेतु माननीय मुख्यमंत्री के प्रगतिशील एवं उदार दृष्टिकोण के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
उन्होंने आश्वस्त किया कि उद्योग विभाग सुदृढ़ नीतिगत क्रियान्वयन, निवेशक सुविधा तथा स्वीकृत परियोजनाओं की निरंतर निगरानी के माध्यम से मुख्यमंत्री के विज़न को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।
प्राथमिकता क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश
इन्वेस्टर मीट के दौरान जिन क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव सामने आए, वे राज्य की दीर्घकालिक औद्योगिक नीति और सतत विकास मॉडल के अनुरूप हैं। इनमें:
फूड प्रोसेसिंग- मूल्य संवर्धन, पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्री-बेस्ड एमएसएमई को मजबूती
फार्मास्यूटिकल्स- अनुसंधान आधारित उत्पादन, बल्क ड्रग्स और निर्यात क्षमता में विस्तार
डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग- आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप रक्षा उत्पादन में भागीदारी
ग्रीन मोबिलिटी- इलेक्ट्रिक वाहन, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और चार्जिंग इकोसिस्टम
सोलर एवं नवीकरणीय ऊर्जा- स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन न्यूट्रलिटी और ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन
ये क्षेत्र न केवल उच्च निवेश गुणक रखते हैं, बल्कि तकनीकी दक्षता, हरित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देते हैं।
नीति-विश्वास और सुशासन का प्रमाण
अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) श्री आर डी. नज़ीम ने कहा कि ये एमओयू केवल निवेश प्रस्ताव नहीं, बल्कि निवेशक विश्वास, नीतिगत स्पष्टता और प्रशासनिक सुगमता का प्रतिबिंब हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार निवेशकों को सिंगल विंडो क्लीयरेंस, समयबद्ध अनुमोदन, और नीति स्थिरता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे निवेश प्रस्ताव वास्तविक उत्पादन इकाइयों में शीघ्र परिवर्तित हो सकें।
संस्थागत समन्वय और क्रियान्वयन पर फोकस
सत्र में निदेशक उद्योग डॉ. यूनुस तथा अतिरिक्त निदेशक श्री तिलक राज शर्मा की सक्रिय भूमिका रही। अधिकारियों ने निवेशकों को राज्य की औद्योगिक पारिस्थितिकी, भूमि उपलब्धता, प्रोत्साहन योजनाओं और एमएसएमई-अनुकूल ढांचे की विस्तृत जानकारी दी।
यह स्पष्ट किया गया कि सरकार का उद्देश्य केवल एमओयू साइन करना नहीं, बल्कि निवेश को धरातल पर उतारना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और राज्य की आय संरचना को सुदृढ़ करना है।
हिमाचल की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक लाभ
अर्थशास्त्रीय दृष्टि से यह निवेश
पूंजी प्रवाह (Capital Inflow) को बढ़ाएगा
औद्योगिक विविधीकरण (Industrial Diversification) को गति देगा
राजस्व आधार (Revenue Base) को मजबूत करेगा
स्थानीय एमएसएमई क्लस्टर्स को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ेगा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह निवेश हिमाचल प्रदेश को ग्रीन, इनोवेशन-ड्रिवन और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इकोनॉमी की दिशा में तेज़ी से आगे ले जाएगा। हिम एमएसएमई फेस्टः 2026 के दूसरे दिन आयोजित यह इन्वेस्टर मीट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की नई आर्थिक कथा का सशक्त अध्याय है।
10,000 करोड़ रूपए के प्रस्तावित निवेश और 37 एमओयू यह संकेत देते हैं कि राज्य अब पारंपरिक औद्योगिक ढांचे से आगे बढ़कर भविष्य की अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा हैकृजहां सतत विकास, निवेशक विश्वास और रोजगार सृजन साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।
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