मंडी, हिमाचल प्रदेश – हिमालय बचाओ नीति के संयोजक गुमान सिंह राणा ने जिला मंडी में कीरतपुर-मनाली फोरलेन के निर्माण कार्य में एनएचएआई (NHAI) की लापरवाही और गलत पहाड़ी कटिंग को हाल ही में हो रहे लगातार भूस्खलनों और गांवों की तबाही का मुख्य कारण करार दिया है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर पहाड़ों की बेतरतीब कटाई ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि दर्जनों परिवारों को उजाड़ने की स्थिति में ला खड़ा किया है।
टनीपरी में तबाही का मंजर
गुमान सिंह राणा ने बताया कि मंडी जिले के टनीपरी (झलोगी टनल के निकट, PSS \_9T/No 13 से ऊपर) में पिछले तीन दिनों से लगातार लैंडस्लाइड हो रहे हैं। यहां फोरलेन निर्माण के दौरान जिस तरह से पहाड़ की कटिंग की गई है, वह पूरी तरह तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों के विपरीत है। नतीजा यह है कि भारी बारिश होते ही मिट्टी, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहकर गांवों को नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने कहा – "जब से इस फोरलेन सड़क की सीधी और बेतरतीब कटिंग हुई है, तब से टनीपरी, शारा, शाला नाल, जला नाल, तुंहल और थ्लौट जैसे गांव भूस्खलन की मार झेल रहे हैं। सच में इस विनाशकारी विकास ने लोगों का जीना हराम कर दिया है।"
गांवों में दरारें, खेत खिसक रहे, लोग बेघर
लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण इन गांवों के घरों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं। खेत-खलिहान धीरे-धीरे धंस रहे हैं। कई परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन और मकान छोड़ने की नौबत आ गई है। अभी तक प्रभावित लोगों को न तो मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास की कोई ठोस योजना बनाई गई है।
गुमान सिंह राणा ने कहा कि स्थानीय लोग वर्षों से NHAI, जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। *"यहां तक कि खतरे के बावजूद प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक जगह पर बसाने की कोई पहल नहीं हुई।"
बरसात से बिगड़ा हालात, नौ परिवार बेघर
इस बरसात के मौसम में स्थिति और भयावह हो गई है। टनीपरी गांव में खेत और खलिहान धंस रहे हैं। झलोगी टनल के मुहाने पर हो रहे भूस्खलन के कारण नौ परिवारों को अपने खून-पसीने की कमाई से बनाए गए घर छोड़ने पड़े हैं। वे अब पास के शाला नाल में बनी बिजली बोर्ड कॉलोनी में अस्थायी रूप से रह रहे हैं।
SDM बाली चौकी ने पंचायत समिति सदस्य शोभाराम भारद्वाज के आग्रह पर प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था की है, लेकिन पशुधन के लिए कोई ठोस प्रबंध अब तक नहीं किया गया है।
स्थानीय नेतृत्व और ग्रामीण कर रहे बचाव कार्य
ब्लॉक समिति सदस्य शोभाराम भारद्वाज और अन्य ग्रामीण लगातार बचाव और राहत कार्य में लगे हुए हैं। वे मलबा हटाने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और अस्थायी निवास व्यवस्था में मदद कर रहे हैं। लेकिन बिना प्रशासनिक और सरकारी सहयोग के ये प्रयास अधूरे साबित हो रहे हैं।
गुमान सिंह राणा का तीखा आरोप
हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह राणा ने सरकार, जिला प्रशासन और NHAI पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा – *"यह विनाशकारी विकास परियोजना लोगों की जान और संपत्ति के लिए खतरा बन चुकी है। अगर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो यह पूरा इलाका उजड़ जाएगा।"*
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार और NHAI ने इस घटना पर कड़ा संज्ञान लेकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रभावित लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और बड़ा आंदोलन होगा।
लोगों की मांगें
1. प्रभावित गांवों के लिए तुरंत मुआवजा।
2. सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की व्यवस्था।
3. भूस्खलन रोकने के लिए स्थायी तकनीकी समाधान।
4. पशुधन के लिए सुरक्षित आश्रय और चारा-पानी की व्यवस्था।
5. फोरलेन निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का पालन।
पर्यावरणीय खतरे और अनदेखी
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में सड़क और सुरंग निर्माण के दौरान अत्यधिक और गलत तरीके की कटिंग भूस्खलन के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है। लेकिन इन चेतावनियों को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। यही कारण है कि इस तरह की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं।
मंडी जिले के टनीपरी और आसपास के गांव फिलहाल प्राकृतिक आपदा और मानवजनित लापरवाही की दोहरी मार झेल रहे हैं। विकास के नाम पर की जा रही गलतियां अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार और NHAI समय रहते इन गलतियों को सुधारेंगे, या फिर यह इलाका भी उन बस्तियों में शामिल हो जाएगा, जो मानचित्र पर सिर्फ नाम भर रह गईं।...डोला सिंह महंत की रिपोर्ट।
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