हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति का पास नहीं किया प्रस्ताव

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हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति का पास नहीं किया प्रस्ताव 

हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति पर ब्रेक 
विधानसभा में खुलासा – 1609 करुणामूलक मामले भी लटके


HimachalTodayTv 

हिमाचल प्रदेश शिमला, 28 अगस्त 2025।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र इस बार रोजगार और नियुक्तियों के मुद्दों पर खासा गर्मा गया। कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता आउटसोर्स रोजगार को लेकर है, लेकिन मुख्यमंत्री ने सदन में साफ शब्दों में कह दिया कि *फिलहाल आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में सरकार का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।*

यह जवाब झंडूता के विधायक जीत राम कटवाल के सवाल पर आया, जिसने प्रदेश भर के हज़ारों आउटसोर्स कर्मचारियों को निराश कर दिया है।

 आउटसोर्स कर्मचारियों की अनिश्चितता

प्रदेश सरकार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 31 जुलाई 2025 तक विभिन्न विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों में आउटसोर्स आधार पर *कुल 220 पद भरे गए हैं।* इनमें 49 तकनीकी, 61 गैर-तकनीकी और 110 अन्य श्रेणियों के पद शामिल हैं।

हालांकि, इन कर्मचारियों का भविष्य अभी भी अनिश्चित है क्योंकि सरकार इनके नियमितीकरण पर कोई नीति नहीं बना रही।

कर्मचारियों का तर्क है कि वे वर्षों से विभागों में काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं और न ही भविष्य की सुरक्षा।

 करुणामूलक नियुक्तियां भी ठप

भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार, पवन कुमार काजल और जीत राम कटवाल ने करुणामूलक नियुक्तियों के मुद्दे को भी सदन में उठाया।

मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि प्रदेश में *करुणामूलक नौकरियों के 1,609 मामले लंबित पड़े हैं।*

इन लंबित मामलों का विभागवार ब्योरा इस प्रकार है –

* जलशक्ति विभाग – 544

* लोक निर्माण विभाग – 264

* उच्च शिक्षा विभाग – 172

* गृह विभाग – 146

* प्राथमिक शिक्षा विभाग – 89

सरकार ने यह भी बताया कि बीते तीन वर्षों में कुल 180 करुणामूलक नियुक्तियां की गईं। इनमें से सबसे ज्यादा 108 जलशक्ति विभाग और 48 लोक निर्माण विभाग में दी गईं।

यह आंकड़े बताते हैं कि लंबित मामलों की तुलना में नियुक्तियों की गति बेहद धीमी है।

बोर्ड और निगमों में पदों पर गिरी गाज

धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में युक्तिकरण की प्रक्रिया के बाद तीन बड़े संस्थानों में **417 पद समाप्त कर दिए गए।**

* नगर निगम शिमला – 52 पद

* औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड – 28 पद

* राज्य विद्युत बोर्ड – 337 पद

बिजली बोर्ड की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां कुल 24,866 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 10,375 पद खाली पड़े हैं। यानि करीब 40% पदों पर कोई कर्मचारी नहीं है, जिससे कार्यक्षमता और सेवा वितरण पर सीधा असर पड़ रहा है।

मल्टी टास्क वर्करों की भी कोई सुनवाई नहीं

नाचन के विधायक विनोद कुमार के सवाल पर मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में *11,577 मल्टी टास्क वर्कर कार्यरत हैं।*

इनमें –

* शिक्षा निदेशालय में – 6,745

* लोक निर्माण विभाग में – 4,831

* खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में – 1

लेकिन, इनके नियमितीकरण को लेकर भी सरकार ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। मल्टी टास्क वर्करों की भी स्थिति आउटसोर्स कर्मचारियों जैसी ही है – असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंताएं।

 कर्मचारियों में बढ़ी नाराजगी

सरकार के इस बयान के बाद आउटसोर्स और मल्टी टास्क वर्करों में **नाराजगी बढ़ना तय है। * प्रदेश भर में लंबे समय से ये कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। कई बार धरने-प्रदर्शन भी हुए, लेकिन अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार की रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पक्की नौकरी का हक नहीं मिल रहा। दूसरी तरफ, करुणामूलक नौकरी के मामलों का अटका रहना उन परिवारों के लिए बड़ी परेशानी है जिनके मुखिया की मौत हो चुकी है और परिवार का गुजारा इसी नौकरी पर टिका है।

 विपक्ष का हमलावर रुख

विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा (एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हुए) सरकार पर हमलावर हो गए हैं। उनका कहना है कि जब सरकार को कर्मचारियों से काम करवाना होता है तो आउटसोर्स भर्ती कर ली जाती है, लेकिन जब नियमित करने की बात आती है तो सरकार पीछे हट जाती है।

विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब **बिजली बोर्ड में 10,375 पद खाली हैं**, तब सरकार नए पद क्यों नहीं भर रही और मौजूदा कर्मचारियों को ही क्यों नियमित नहीं कर रही?

आम जनता पर असर

सरकारी विभागों में खाली पद और अस्थायी कर्मचारियों की भरमार का सीधा असर आम जनता पर भी पड़ रहा है।

* बिजली बोर्ड में खाली पदों के कारण शिकायत निवारण में देरी

* शिक्षा विभाग में मल्टी टास्क वर्करों की कमी से विद्यालयों में अव्यवस्था

* जलशक्ति विभाग में करुणामूलक नियुक्तियां लंबित रहने से कामकाज बाधित

जनता का कहना है कि सरकार को राजनीतिक खींचतान से हटकर रोजगार और सेवा गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री के इस बयान ने साफ कर दिया है कि फिलहाल आउटसोर्स कर्मचारियों और मल्टी टास्क वर्करों की नियमितीकरण की मांग पर सरकार कोई निर्णय नहीं ले रही।

सरकार पर दबाव बढ़ना तय 

हालांकि, रोजगार का यह मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। आने वाले महीनों में कर्मचारियों के संगठन आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ना तय है।

हिमाचल प्रदेश की मौजूदा स्थिति यह साफ दर्शाती है कि रोजगार और नियमितीकरण के मुद्दे प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए *सिरदर्द बने हुए हैं।*

जहां एक ओर आउटसोर्स कर्मचारी और मल्टी टास्क वर्कर वर्षों से अपनी नौकरी को स्थायी करने की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने इस पर किसी भी तरह की नीति बनाने से इनकार कर दिया है। साथ ही, करुणामूलक नौकरियों के 1609 मामले लंबित रहना भी प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली को उजागर करता है।

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