Mandi-बालीचौकी में भूस्खलन से 60 परिवार प्रभावित, 19 घर खाली, भुगर्भीय अध्ययन की मांग

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Mandi-बालीचौकी में भूस्खलन से 60 परिवार प्रभावित, 19 घर खाली, भुगर्भीय अध्ययन की मांग

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र में भूस्खलन से दर्जनों घर और दुकानें प्रभावित हुई हैं। शारश और बेला गांव में 60 परिवार प्रभावित हुए हैं जबकि 19 घरों को खाली करवाया गया है। कई भवनों में दरारें आ गई हैं और सड़क मार्ग ध्वस्त होने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने विधानसभा में इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने की अपील की है और प्रभावित क्षेत्र का भुगर्भीय अध्ययन कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को तत्काल राहत दी जाए और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पुनः स्थापित किया जाए।

HimachalTodayTv.

बालीचौकी, मंडी (हिमाचल प्रदेश), 21 अगस्त।

मंडी जिला का बालीचौकी क्षेत्र इन दिनों भूस्खलन की चपेट में है। लगातार बारिश और ढलानों के खिसकने से गांवों और बाजार में भारी क्षति हुई है। शारश, बेला, खलाओ और रही सहित कई गांवों में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

60 परिवार प्रभावित, 19 घर खाली

बीते कुछ दिनों से शारश गांव में दलीप सिंह के घर के नीचे की ढलान खिसकने लगी। इसके बाद आसपास के 13 भवनों में दरारें आ गईं, जिनमें 9 को खाली करवा दिया गया है। यहां तक कि थाची चौक से ज़ीरो चौक बस स्टैंड तक के कई घर और दुकानें भी प्रभावित हुए हैं। बताया जा रहा है कि इन दुकानों से करीब 40 लोग आजीविका चला रहे थे।

बेला नाल गांव में भी पूरे पहाड़ की ढलान धंसने लगी है। अब तक 19 मकानों को खाली कर दिया गया है। लोग अपनी सुरक्षा को देखते हुए घर छोड़कर रिश्तेदारों या अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं।

 सड़क मार्ग ध्वस्त, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

भूस्खलन के चलते बालीचौकी से शारश, खलाओ और रही जाने वाले सभी तीनों रास्ते ध्वस्त हो गए हैं। इस कारण न तो लोग बाजार तक पहुंच पा रहे हैं और न ही बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं। लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलकर वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं।

 इतिहास दोहराता खतरा

यह क्षेत्र पहले भी भूस्खलन से प्रभावित हो चुका है। वर्ष 2023 में नाग मंदिर के पास हुए भूस्खलन से 6 भवन ध्वस्त हो गए थे। इस बार हालात और गंभीर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग एक किलोमीटर लंबी ढलान धीरे-धीरे धंस रही है। पहाड़ की चट्टानें कच्ची और भुरभुरी हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

 भूगर्भीय अध्ययन की मांग

हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने इस आपदा को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू और विधानसभा से अपील की है कि इस विषय पर कठोर और ठोस निर्णय लिए जाएं। गुमान सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार को प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत भूगर्भीय अध्ययन कराना चाहिए ताकि भविष्य में सुरक्षित पुनर्वास की योजना बनाई जा सके।

उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि मानसून के दौरान आई इस आपदा पर विधानसभा में चर्चा कराना सराहनीय कदम है। लेकिन अब सिर्फ चर्चा से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत पर ठोस कार्यवाही आवश्यक है।

हिमालय नीति अभियान ने राज्य सरकार और विधानसभा से आग्रह किया है कि जलवायु परिवर्तन और बार-बार हो रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के विकास मॉडल की गंभीर समीक्षा की जाए। अभियान का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है और यहां अंधाधुंध निर्माण कार्यबड़े प्रोजेक्ट्स और अनियोजित ढाँचागत विकास न केवल पारिस्थितिकीय संतुलन को बिगाड़ रहे हैंबल्कि लोगों की सुरक्षा और आजीविका के लिए भी खतरा बन रहे हैं।

9 बिंदु- पॉइंट-टू-पॉइंट विधानसभा चर्चा नोट 

हिमाचल विधानसभा में चर्चा की मांग करते हुए सरकार को भेजा 9 सुत्री सुझाव पत्र

1. जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में अनियमित वर्षाअतिवृष्टिबादल फटना और भूस्खलन जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन पर गहन अध्ययन और नीति निर्माण आवश्यक है।

 2. विकास मॉडल की समीक्षा

 प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकीवहन क्षमतापारंपरिक ज्ञान और भूगर्भीय स्थिति को नजरअंदाज कर हो रहे विकास कार्यों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए।

3. बड़े ढाँचागत प्रोजेक्ट्स का ऑडिट

 सीमेंट उद्योगखनन गतिविधियां और जलविद्युत परियोजनाओं सहित सभी बड़े सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स का स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट अनिवार्य किया जाए।

 4. फोरलेन सड़कें और NHAI की जांच

 प्रदेश में चल रहे फोरलेन और अन्य सड़क निर्माण कार्यों पर विधानसभा की विशेष समिति गठित कर NHAI की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता की जांच की जाए।

  5. पूर्व चेतावनी प्रणाली

 आपदा प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र का विकास किया जाए ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित किया जा सके।

 6. राहत और पुनर्वास

 आपदा प्रभावितों को राहत और पुनर्वास के लिए पारदर्शी व्यवस्था हो। विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट और व्यवहार्य पुनर्वास नीति बनाई जाए।

  7. "हिमालय नीति" का निर्माण

 प्रदेश की पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय संतुलन को सुरक्षित रखते हुएसमुदाय आधारितपर्यावरण-मैत्री और संरक्षण-आधारित विकास मॉडल अपनाकर एक मजबूत हिमालय नीति बनाई जाए।

 8. जलवायु परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी

EBA (Ecosystem Based Adaptation) उपायों को बढ़ावा दिया जाए। FRA (Forest Rights Act) के अंतर्गत CFR और CFRR अधिकारों को मान्यता देकर सामुदायिक वन प्रबंधन और संरक्षण को मजबूत किया जाए।

 9. भविष्य के लिए सुरक्षित योजना

 प्राकृतिक आपदाएं भविष्य में और अधिक बढ़ेंगी। इसलिए लचीले (resilient) बुनियादी ढांचेसुरक्षित आवासीय क्षेत्रों की पहचान और बसावट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Mandi-बालीचौकी में भूस्खलन से 60 परिवार प्रभावित, 19 घर खाली, भुगर्भीय अध्ययन की मांग

प्रभावितों की मांग

स्थानीय लोगों ने भी सरकार से अपील की है कि उन्हें असुरक्षित मकानों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पुनः स्थापित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार भारी बारिश में ढलान खिसकने से जान-माल का खतरा बना रहता है। बच्चों की पढ़ाई, रोज़गार और आजीविका पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

बालीचौकी क्षेत्र का भूस्खलन अब प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले चुका है। लगभग 60 परिवार प्रभावित हैं, 19 घर खाली हो चुके हैं और बाजार की दुकानें बंद हो गई हैं। क्षेत्र की सड़कें टूट चुकी हैं और लोग असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में भूगर्भीय अध्ययन और दीर्घकालिक योजना ही भविष्य में इस तरह की त्रासदी से बचाव का एकमात्र उपाय है। ... ब्यूरो.

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