Mandi-Kullu-Highway: भारी बारिश और भूस्खलन के बीच यात्रियों का सहारा बनी आर्मी की 133 ईको टास्क फोर्स

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Mandi-Kullu-Highway: बारिश और भूस्खलन के बीच यात्रियों का सहारा बनी आर्मी की 133 ईको टास्क फोर्स

हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से मंडी-कुल्लू एनएच-21 (किरतपुर-मनाली फोरलेन) जगह-जगह भूस्खलन से बाधित हो गया है। हजारों यात्री जाम में फंसे हुए हैं। इस कठिन परिस्थिति में झलोगी स्थित 133 ईको टास्क फोर्स, TA, BN, आर्मी डोगरा रेजिमेंट यात्रियों के लिए मसीहा साबित हुई है। सूबेदार दिलीप शर्मा की अगुवाई में टीम ने न केवल यात्रियों को भोजन और राहत दी बल्कि करीब 150 महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थान तक आर्मी वाहनों से पहुंचाया। लोगों ने सेना की इस मानवता और देशभक्ति से भरी सेवा को सलाम किया और आभार जताया।

HimachalTodayTv.

मंडी (हिमाचल प्रदेश), 20 अगस्त।

हिमाचल प्रदेश में भारी बरसात का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी जिलों में तबाही मचा दी है। मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-21) पर जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कीरतपुर-मनाली फोरलेन सड़क की हालत बेहद दयनीय है। हजारों यात्री घंटों से नहीं बल्कि कई-कई दिनों से सड़क पर फंसे हुए हैं।

इसी बीच झलोगी में स्थित 133 ईको टास्क फोर्स (TA, BN, आर्मी डोगरा रेजिमेंट) यात्रियों के लिए एक वरदान बनकर उभरी है। सूबेदार दिलीप शर्मा की अगुवाई में इस टीम ने जिस तरह से मानवीय सेवा और देशभक्ति का उदाहरण पेश किया, उसकी सराहना पूरे इलाके में की जा रही है।

यात्रियों के लिए संकट बनी भारी बारिश और भूस्खलन

भारी बारिश से मंडी-कुल्लू मार्ग पर थलौट से लेकर जोगनी माता मोड़ (कैंची मोड़) तक का सफर यात्रियों के लिए बेहद कठिन साबित हुआ। जगह-जगह भूस्खलन, सड़क पर गिरे पत्थर और मलबा, नालों में उफान और जाम की स्थिति ने आम लोगों का जीना दुश्वार कर दिया।

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ऐसी विकट परिस्थिति में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे-छोटे बच्चे अपना सामान सिर पर उठाकर पैदल ही रास्ता पार करने को मजबूर हो गए। लेकिन जैसे ही हालात और बिगड़े, सेना की ईको टास्क फोर्स यात्रियों के लिए राहत की किरण बनकर सामने आई। 

सूबेदार दिलीप शर्मा की टीम बनी मसीहा

जब सेना की 133 ईको टास्क फोर्स की टीम ने सड़क पर फंसे सैकड़ों यात्रियों की हालत देखी, तो तुरंत मानवीय पहल शुरू की।

* यात्रियों को अपने कैंप में ले जाकर जलपान की व्यवस्था की गई।

* कई बुजुर्ग और बीमार यात्रियों को अस्थायी शिविर में ठहरने की सुविधा दी गई।

* यात्रियों को मानसिक और शारीरिक रूप से संभालने के लिए सेना के जवान हर समय सक्रिय रहे।

यह कार्य केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेना ने इंसानियत और देशभक्ति की मिसाल पेश की।

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150 से अधिक महिलाओं-बच्चों को सुरक्षित पहुंचाया

133 ईको टास्क फोर्स ने अपने आर्मी वाहनों के जरिए लगभग 150 महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को जाम से निकालकर पंडोह कैंची मोड़ तक सुरक्षित पहुंचाया।

इस पुनीत कार्य को देखकर यात्रियों की आंखों में आंसू छलक उठे। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में जब हर तरफ भय और अफरा-तफरी का माहौल था, सेना के जवानों ने उन्हें जीवनदान दिया।

 यात्रियों का आभार और स्थानीय सराहना

भूस्खलन में फंसे सैकड़ों यात्रियों ने सेना का दिल से आभार व्यक्त किया। कई यात्रियों ने कहा कि अगर सेना न होती तो शायद वे इस मुश्किल हालात से सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाते।

स्थानीय लोगों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी सेना के इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि 133 ईको टास्क फोर्स ने जिस तरह मानवता का परिचय दिया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है।

 NHAI और प्रशासन के लिए चुनौती

लगातार हो रही बारिश के कारण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टीमों के लिए सड़क बहाल करना बड़ी चुनौती बन गया है। जगह-जगह मलबा हटाने का कार्य जारी है, लेकिन बारिश के चलते काम बार-बार बाधित हो रहा है।

प्रशासन ने यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है और लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत यात्रा पर न निकलें।

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सेना की सामाजिक भूमिका

आमतौर पर सेना को सीमाओं पर दुश्मनों से लड़ते हुए देखा जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने आपदा की घड़ी में सामाजिक जिम्मेदारी निभाई।

133 ईको टास्क फोर्स का यह कार्य दिखाता है कि आर्मी केवल देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि जनता की सेवा और सहायता के लिए भी हमेशा तत्पर रहती है।

हिमाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हजारों लोग मुश्किलों में फंसे हुए हैं। लेकिन इस विपदा में सेना की 133 ईको टास्क फोर्स, TA, BN, आर्मी डोगरा रेजिमेंट ने जो सेवा और मदद की है, वह इतिहास में एक मिसाल के रूप में दर्ज होगी।

सूबेदार दिलीप शर्मा और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि मानवता और देशभक्ति सबसे ऊपर है। यात्रियों के लिए वे न केवल रक्षक बने, बल्कि संकट की इस घड़ी में सच्चे मसीहा भी साबित हुए। ---डोला सिंह महंत की रिपोर्ट। 

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