Mandi News: सरकारी संपत्तियां प्राइवेट हाथों में? सुंदरनगर-धनोटू रेस्ट हाउस ठेके पर देने के फैसले पर उठे सवाल

 
सुंदरनगर में बने आधुनिक रेस्ट हाउस के बाहर का दृश्य, जिसे ठेके पर देने के फैसले को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा और विरोध की स्थिति

Mandi News: सरकारी संपत्तियां प्राइवेट हाथों में? सुंदरनगर-धनोटू रेस्ट हाउस ठेके पर देने के फैसले पर उठे सवाल

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सुंदरनगर (मंडी): आर्थिक संकट के बीच सरकार द्वारा सुंदरनगर और धनोटू के नए रेस्ट हाउसों को ठेके पर देने की तैयारी अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठने लगे हैं—क्या सरकारी संपत्तियां धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंपी जा रही हैं?

जानकारी के अनुसार, सुंदरनगर में वर्ष 2023 में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक रेस्ट हाउस का संचालन अब प्राइवेट ठेकेदार को देने की योजना है। इसके लिए अभी भी फर्नीचर और साइट डेवलपमेंट पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद इसे आउटसोर्स करने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।

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इसी तरह धनोटू में हाल ही में उद्घाटित रेस्ट हाउस को भी ठेके पर देने की तैयारी अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा उद्घाटन के बाद इतनी जल्दी ठेका प्रणाली अपनाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

🔴 सामाजिक और स्थानीय प्रभाव पर उठी चिंता

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेस्ट हाउस निजी हाथों में चले जाते हैं, तो आम लोगों के लिए यहां ठहरना महंगा हो सकता है। सरकारी रेस्ट हाउस आम जनता, यात्रियों और स्थानीय आयोजनों के लिए सुलभ माने जाते रहे हैं, लेकिन ठेका प्रणाली के बाद यह सुविधा सीमित हो सकती है।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर घट सकते हैं, क्योंकि निजी कंपनियां अपने स्तर पर स्टाफ नियुक्त करती हैं। वहीं, पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं।

👉 अब बड़ा सवाल:
क्या यह फैसला आर्थिक मजबूरी है या सरकारी संसाधनों के निजीकरण की शुरुआत? इस मुद्दे पर जनता और सरकार के बीच बहस तेज होती दिख रही है।

🔴 सरकार का पक्ष

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ठेका प्रणाली से बेहतर रखरखाव और राजस्व में वृद्धि होगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ई. रोशन ठाकुर के अनुसार, रेस्ट हाउस का शेष कार्य जल्द पूरा कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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