Mandi News: मंडी में किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविरों की पहल, पशु आहार से लेकर एग्रोफॉरेस्ट्री सिखाई तकनीक
Highlights (मुख्य बिंदु):
- मंडी जिले में किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविरों की श्रृंखला
- सुंदरनगर में पशु आहार बनाने की आधुनिक तकनीक सिखाई
- थुनाग में 5 दिवसीय एग्रोफॉरेस्ट्री प्रशिक्षण कार्यक्रम
- कम लागत में अधिक उत्पादन और आय बढ़ाने पर जोर
- मृदा स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और बाजार से जुड़ाव पर जानकारी
- किसानों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण और फील्ड विजिट का अनुभव
Himachal Today Tv.
मंडी/सुंदरनगर: किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ व लाभदायक बनाने के उद्देश्य से मंडी जिले में प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी कड़ी में सुंदरनगर और थुनाग क्षेत्र में पशु आहार और कृषि वानिकी (एग्रोफॉरेस्ट्री) पर आधारित प्रशिक्षण शिविरों का सफल आयोजन किया गया।
सुंदरनगर के धनोटू विकास खंड की ग्राम पंचायत अप्पर बेहली के समकल गांव में आयोजित दो दिवसीय शिविर में किसानों को प्राकृतिक एवं संतुलित पशु आहार तैयार करने की आधुनिक तकनीक सिखाई गई। कृषि विभाग के ‘आत्मा’ प्रोजेक्ट के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से कम लागत में पौष्टिक आहार तैयार करने के तरीके बताए गए, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में वृद्धि संभव हो सके। कृषि विभाग के अंतर्गत कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) द्वारा आयोजित इस शिविर में किसानों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से कम लागत में पौष्टिक पशु आहार बनाने का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया।
खंड तकनीकी प्रबंधक लेखराज ने किसानों को विस्तार से समझाया कि किस प्रकार सही आहार से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार, दूध उत्पादन में वृद्धि और खर्च में कमी लाई जा सकती है। शिविर के दौरान किसानों को यह भी बताया गया कि संतुलित आहार न केवल पशुओं की उत्पादकता बढ़ाता है, बल्कि उनकी गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है। इस प्रशिक्षण में करीब 30 से 35 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नई तकनीकों को सीखकर लाभ उठाया।
थुनाग में पशु आहार से लेकर एग्रोफॉरेस्ट्री तक सिखाई आधुनिक तकनीक
वहीं, डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के उप-परिसर थुनाग (गोहर–गुडाहरी) में पाँच दिवसीय संस्थागत कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को एग्रोफॉरेस्ट्री की आधुनिक तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और आय बढ़ाने के टिकाऊ उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में मृदा स्वास्थ्य, फसल प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, औषधीय पौधों की खेती और बहुउद्देशीय वृक्ष प्रजातियों के चयन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया। साथ ही किसानों को मूल्य संवर्द्धन, प्रसंस्करण, भंडारण, फ्लोरीकल्चर, पशुपालन प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के बारे में भी जानकारी दी गई।
कार्यक्रमों के दौरान किसानों को हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और प्रदर्शन के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया। इन पहल से किसानों के कौशल में वृद्धि के साथ उनकी आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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